
अभिनव चौधरी, अपने बड़े भाई देवेंद्र,, और कुछ खास दोस्त—पुराने स्कूल के साथी—एक दरी पर बैठे हुए थे। बीच में तसले में बर्फ और देशी ब्रांड की बोतलें रखी हुईं थीं। गिलासों की टन-टन और हंसी की आवाज़ें हल्की हवा में घुल रही थीं।


अभिनव चौधरी, अपने बड़े भाई देवेंद्र,, और कुछ खास दोस्त—पुराने स्कूल के साथी—एक दरी पर बैठे हुए थे। बीच में तसले में बर्फ और देशी ब्रांड की बोतलें रखी हुईं थीं। गिलासों की टन-टन और हंसी की आवाज़ें हल्की हवा में घुल रही थीं।

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