01

आरिश दीवान उर्फ AD

Mine since Ten

Part 1

बंगलौर,

कमरे में हल्की पीली रोशनी जल रही थी। खिड़की के परदे हवा से धीमे-धीमे हिल रहे थे। बिस्तर पर एक लड़की उसकी उम्र 30 साल की थी, वो गहरी नींद में सो रही थी, उसके बाल तकिए पर बिखरे हुए थे, और चेहरा शांत लग रहा था। जैसे वो चैन की नींद सो रही हो।

तभी अचानक से उस कमरे का दरवाज़ा बहुत धीरे से खुला।

और एक हैंडसम सा एक लड़का जिसकी उम्र 20 साल की थी। वो बिना आवाज़ किए अंदर आया। कुछ पल वह दरवाज़े के पास खड़ा होकर उस लड़की को देखता रहा…

जैसे किसी सोच में डूबा हो। फिर धीरे-धीरे कदम बढ़ाता हुआ बिस्तर तक आया और उसके बगल में आकर लेट गया। उसके बगल में लेट कर वो लड़का उस लड़की को करीब से देखने लगा।। जैसे जैसे वो उसे देख रहा था वैसे वैसे वो उसके तरफ अट्रैक्ट हो रहा था।।

तभी वो लड़का धीरे से आगे बढ़ कर उसे किस कर लेता है।। जिससे गद्दे की हल्की सी हरकत से उस लड़की की नींद टूट गई।

उसने करवट बदली… और अपना सामने उसे देखकर चौंक गई।

“तुम?!” उसकी आवाज़ आधी नींद और आधे गुस्से से भरी थी।

“आरिश , तुम मेरे कमरे में क्या कर रहे हो?”

वहीं वो लड़का जिसका नाम आरिश दीवान उर्फ AD था। बिल्कुल आराम से छत की तरफ देखते हुए बोला,

“आराम कर रहा हूँ कायू...।”

“ये मज़ाक है क्या? बिना बताए मेरे कमरे में आ गए?”

कहते हुए वो उठकर बैठ गई, उसकी आँखों में नाराज़गी साफ झलक रही थी।

इस पर आरिश भी अब उसकी तरफ मुड़ा। उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान थी।

“ये घर मेरा है,” उसने धीमे लेकिन ठोस लहज़े में कहा, “मैं जहाँ चाहूँ, जब चाहूँ जा सकता हूँ कायू...”तुम मुझे रोक नहीं सकती...!

“घर तुम्हारा है, लेकिन ये मेरा कमरा है ।” उस लड़की ने भी हल्के गुस्से से कहा।

इस पर आरिश उस लड़की के थोड़ा और करीब सरक आया, लेकिन उसकी आवाज़ अब भी शांत थी—

“और तुम…?”

जिससे उस लड़की ने भौंहें सिकोड़ लीं।

“मैं क्या?”

फिर वो उसकी आँखों में देखते हुए बोला,

“तुम भी तो इसी घर का हिस्सा हो।”

“और वैसे भी तुम तभी से मेरी हो… जब मैं दस साल का था।”

ये सुनकर उस लड़की की साँस जैसे एक पल को अटक गई।

“क्या मतलब है तुम्हारा?”

वो हल्का सा मुस्कुराया, लेकिन इस बार उसकी आँखों में शरारत नहीं… एक गहराई थी।

“याद है… वो दिन?”

“जब आप रो रही थीं… और मैंने कहा था— बड़ा होकर आपसे ही शादी करूँगा कायू।”

ये सुनकर तो वो लड़की की उँगलियाँ चादर पर कस गईं।

तब तुम सिर्फ दस साल के थे आरिश..!

“वो…तुम्हारा बचपना था ।”

“नहीं,” उसने तुरंत जवाब दिया।

“वो आपके लिए बचपना था…कायू लेकिन मेरे लिए वादा था।”

अब उस कमरे की हवा जैसे भारी हो गई।

उस लड़की शॉक्ड चेहरे के साथ कहा,"

“तुम्हें पता भी है तुम क्या कह रहे हो?” उसने फुसफुसाते हुए कहा।

इस पर आरिश उस लड़की के थोड़ा और करीब आया, लेकिन इस बार उसकी आवाज़ में ज़िद नहीं… एहसास था।

“दस साल का था मैं… पर उस दिन जो महसूस किया था, वो आज भी वैसा ही है कायू।”

“मैंने इंतज़ार किया है… बड़ा होने का… आपके लायक बनने का।”

ताकि मैं आप पर अपना right क्लेम कर सकूं।

उसकी बाते सुनकर उस लड़की की धड़कनें तेज़ हो चुकी थीं।

वो धीरे से बोली—

“और अगर मैं तुम्हारी ना हुई तो?”

वो बिना पलक झपकाए उसकी आँखों में देखता रहा।

“तो भी…”

“मैं आपको किसी और का नहीं होने दूँगा कायू।”

ये कहते हुए आरिश के चेहरे पर एक जुनून से भरी expression थे। जो नॉर्मल तो बिल्कुल भी नहीं लग रहे थे।।

उसकी आवाज़ में कोई ऊँचाई नहीं थी…

लेकिन वादा अब भी उतना ही अडिग था—जितना उस दस साल के बच्चे की आँखों में था। जिसे तब वो लड़की समझ नहीं पाई थी।।

लेकिन अब उसे आरिश के बातो से डर लगने लगा था।।

क्या होगा आगे??

जानने के लिए बने रहिए मेरे साथ इस कहानी में..!

Mine since Ten

क्या होगा कियाँशी के साथ??

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जय भोलेनाथ 🙏 🙏

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