हॉस्टल रूम, शाम का वक्त
बेला खामोशी से अपने बेड पर बैठी हुई थी, हाथ में फोन पकड़े हुए। उसका चेहरा बुझा हुआ लग रहा था । तभी दरवाज़ा खुलता है और श्रुति, दीपाली और रेशमा एक साथ अंदर आती हैं।

हॉस्टल रूम, शाम का वक्त
बेला खामोशी से अपने बेड पर बैठी हुई थी, हाथ में फोन पकड़े हुए। उसका चेहरा बुझा हुआ लग रहा था । तभी दरवाज़ा खुलता है और श्रुति, दीपाली और रेशमा एक साथ अंदर आती हैं।

Write a comment ...
Write a comment ...